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यूपी के 5 जिलों में फोर लेन कनेक्टिविटी के लिए केंद्र की सहमति, NH के 154 किमी हिस्से का होगा चौड़ीकरण

   यूपी सरकार ने यूपी के पांच जिलों को फोर लेन नेटवर्क से जोड़ने के लिए केंद्र के सामने प्रस्ताव रखा था, जिस पर अब सैद्धांतिक सहमति बन गई है। NH के 154 किमी हिस्से का चौड़ीकरण किया जाएगा।

लखनऊ: सड़क कनेक्टविटी में कई राज्यों को पीछे छोड़ चूके यूपी का फोकस अब बचे गैप को भरने पर है। इसी कड़ी में तराई और पूर्वांचल के उन जिलों पर अब फोकस किया जा रहा है जिनकी अभी राजधानी तक फोर लेन कनेक्टिविटी नहीं हुई है। ऐसे पांच जिलों को फोर लेन नेटवर्क से जोड़ने के लिए केंद्र के सामने प्रस्ताव रखा गया था, जिस पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है।

हाईवे के 154 किमी हिस्से का होगा चौड़ीकरण

पीलीभीत, बलिया, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर ऐसे जिले हैं जिनकी लखनऊ से पूरी तरह फोर लेन कनेक्टिविटी नहीं है। इसके लिए नेशनल हाइवेज के 154.5 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण और उन्नयन करना होगा। पिछले सप्ताह सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के बीच बैठक के दौरान यह प्रस्ताव रखा गया था, जिस पर केंद्र का रूख सकारात्मक रहा।

जानिए कितना हिस्सा फोन लेन में बदलेगा

प्रस्ताव के अनुसार, पीलीभीत में एनएच-30 का 12 किलोमीटर, बलिया में एनएच-31 का 12.5 किलोमीटर, महाराजगंज में एनएच-730 का 21 किलोमीटर, सिद्धार्थनगर में एनएच-28 का 70 किलोमीटर और बलरामपुर में एनएच-330 का 39 किलोमीटर हिस्सा चार लेन में विकसित किया जाना है। सरकार का कहना है कि इससे क्षेत्रीय आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास को गति मिलेगी।

33 जिलों को जोड़ने के लिए 2500 किमी NH अपग्रेड होगा

प्रदेश में एक्सप्रेसवेज के विस्तार के बीच 33 जिला मुख्यालय ऐसे हैं जो आपस में फोरलेन कनेक्टविटी से नहीं जुड़े हैं। इसके लिए उन नेशनल हाइवेज पैच का चौड़ीकरण किया जाएगा, जो अभी फोर लेन मानक के अनुरूप विकसित नहीं हैं। योजना पूरी होने पर जिलों के बीच तेज, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली संपर्क व्यवस्था स्थापित होगी और माल और यात्री परिवहन की दक्षता बढ़ेगी। इन संपर्क मार्गों की कुल लंबाई 2576.18 किलोमीटर है। इनको अपग्रेड किए जाने का प्रस्ताव दिया गया है।

ये जिला मुख्यालय फोर लेन से कनेक्ट होंगे

अमेठी-प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर-सुल्तानपुर, अयोध्या-गोंडा, बाराबंकी-बहराइच, सुल्तानपुर-अमेठी, अलीगढ़-बदायूं, आगरा-एटा, मैनपुरी-फर्रुखाबाद, इटावा-कन्नौज, कानपुर देहात-हमीरपुर, कानपुर नगर-हमीरपुर, गोरखपुर-महाराजगंज, महाराजगंज-कुशीनगर, महोबा-झांसी, गोंडा-बस्ती, बलरामपुर-गोंडा, बहराइच-लखीमपुर खीरी, प्रतापगढ़-जौनपुर, प्रयागराज-चित्रकूट, फतेहपुर-बांदा, पीलीभीत-लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर-फर्रुखाबाद, संतकबीरनगर-सिद्धार्थनगर, सिद्धार्थनगर-बस्ती, चित्रकूट-फतेहपुर, बांदा-महोबा, हमीरपुर-महोबा, रायबरेली-प्रतापगढ़, हरदोई-कन्नौज, मुरादाबाद-बदायूं, मेरठ-बागपत, गाजीपुर-जौनपुर और जौनपुर-प्रयागराज।

टोल से हो सड़क नुकसान की भरपाई

नेशनल हाइवेज के निर्माण के दौरान मिट्टी और निर्माण सामग्री ढोने वाले भारी वाहन बड़ी संख्या में राज्य और ग्रामीण सड़कों का उपयोग करते हैं। भार क्षमता कम होने के कारण कई सड़कें खराब हो जाती हैं, लेकिन इनके मरम्मत की कोई निर्धारित व्यवस्था नहीं है। नतीजतन मरम्मत का पूरा अतिरिक्त खर्च राज्य सरकार को उठाना पड़ता है।

निर्माण का खर्च उठाने के लिए बनेगी व्यवस्था

एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि केंद्र के समक्ष यह विषय रखा गया था कि इस निर्माण का खर्च उठाने की कोई व्यवस्था बनाई जाए। यूपी की ओर से यह सुझाव दिया गया कि नेशनल हाइवेज पर वसूले जाने वाले टोल राजस्व का एक उपयुक्त हिस्सा उन राज्य मार्गों और ग्रामीण सड़कों की मरम्मत के लिए निर्धारित किया जाए, जो नैशनल हाइवे बनाने के दौरान खराब होती हैं। इससे सड़कों की समयबद्ध मरम्मत हो सकेगी और राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। केंद्र की ओर से इस दिशा में कदम उठाए जाने का आश्वासन दिया गया है।

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