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केरल में फंसे”ब्रिटेन का पांचवीं पीढ़ी का F-35B लड़ाकू विमान मामला :टेक्नोलॉजी चोरी का डर या शर्मिंदगी?

    टॉम शार्प ने आशंका जताते हुए लिखा है कि “भारत और ब्रिटेन के संबंध पहले से ही कई स्तरों पर जटिल बने हुए हैं, चाहे वह खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर तनाव हो या दोनों देशों के बीच व्यापार समझौतों पर चल रही खींचतान। ऐसे में ब्रिटेन का सबसे आधुनिक और संवेदनशील सैन्य विमान भारत की धरती पर फंसा रहना अच्छी बात नहीं है।

लंदन: ब्रिटेन का पांचवीं पीढ़ी का F-35B लड़ाकू विमान पिछले 22 दिनों से केरल में फंसा हुआ है। आज ब्रिटेन के कई इंजीनियर्स फाइटर जेट की मरम्मत करने केरल पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि ब्रिटेन इस फाइटर जेट को मरम्मत नहीं होने की स्थिति में एयरलिफ्ट करने पर विचार कर रहा है। ब्रिटिश नेवी के पूर्व सीनियर अधिकारी टॉम शार्प ने द टेलीग्राफ के एक लेख में कहा है कि ‘भारत में करोड़ों पाउंड के स्टील्थ जंपजेट को छोड़ना अच्छी बात नहीं है।’ जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ब्रिटिश एक्सपर्ट भारत में फंसे अपने स्टील्थ फाइटर जेट की स्थिति को लेकर शर्मिंदा हो रहे हैं और इसीलिए टेक्नोलॉजी चोरी की बात कर रहे हैं।

उन्होंने लिखा है कि “ब्रिटेन का पांचवीं पीढ़ी का F-35B लड़ाकू विमान, जिसकी कीमत करोड़ों पाउंड है, इन दिनों केरल के तिरुवनंतपुरम एयरबेस पर फंसा हुआ है। यह घटना तब घटी जब HMS प्रिंस ऑफ वेल्स पर खराब मौसम के चलते विमान को समुद्र पर लैंड नहीं कराया जा सका और उसे वैकल्पिक रूप से भारत की जमीन पर उतरना पड़ा। हालांकि विमान ने सुरक्षित लैंडिंग की, लेकिन इसके बाद उसमें एक संभावित हाइड्रॉलिक गड़बड़ी सामने आई, जिसे अब दो हफ्ते से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ठीक नहीं किया जा सका है।”

तकनीकी खराबी और मरम्मत की चुनौती
टॉम शार्प ने लिखा है कि “F-35B जैसे स्टेल्थ जेट्स आम जेट की तरह नहीं होते, ये एक संपूर्ण उड़ता हुआ सिस्टम होते हैं, जिनकी मरम्मत सिर्फ विशेष विशेषज्ञता, उपकरणों और सामरिक इजाजत के साथ ही संभव होती है। ब्रिटिश नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि इस विमान में आई खराबी संभवतः हाइड्रॉलिक प्रणाली से जुड़ी है, जो कि आमतौर पर गहरे तकनीकी हस्तक्षेप की मांग करती है। HMS प्रिंस ऑफ वेल्स के पास या आस-पास इस जटिल मरम्मत की सुविधा नहीं थी और यही वजह है यह जेट भारत की धरती पर ही अटका रह गया। इसमें कोई संदेह नहीं कि ब्रिटेन ने इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए कूटनीतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर विकल्प तलाशे होंगे, लेकिन अभी तक वह सफल नहीं हो पाया है।”

टॉम शार्प ने आशंका जताते हुए लिखा है कि “भारत और ब्रिटेन के संबंध पहले से ही कई स्तरों पर जटिल बने हुए हैं, चाहे वह खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर तनाव हो या दोनों देशों के बीच व्यापार समझौतों पर चल रही खींचतान। ऐसे में ब्रिटेन का सबसे आधुनिक और संवेदनशील सैन्य विमान भारत की धरती पर फंसा रहना, स्वाभाविक रूप से दोनों पक्षों के बीच ‘राजनीतिक कीमत’ का विषय बन सकता है। हालांकि भारत ने अब तक सुरक्षा और सहयोग को लेकर सकारात्मक रवैया दिखाया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सैन्य मामलों में निर्भरता का मुद्दा अक्सर दीर्घकालीन रणनीति को प्रभावित करता है।

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