वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध जौनपुर और गाजीपुर के लगभग 70% बीएड कॉलेजों में वर्षों से अनुमोदित शिक्षक नहीं हैं। इसके बावजूद प्रवेश, परीक्षा और परिणाम नियमित रूप से चल रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध जौनपुर और गाजीपुर के बीएड महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि दोनों जनपदों के करीब 70 प्रतिशत बीएड कॉलेजों में वर्षों से अनुमोदित शिक्षक नहीं हैं। इसके बावजूद प्रवेश प्रक्रिया से लेकर परीक्षा और परिणाम तक का पूरा काम नियमित रूप से चलता रहा है।
नियमों के अनुसार बीएड महाविद्यालयों में निर्धारित संख्या में योग्य एवं विश्वविद्यालय से अनुमोदित शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य है,लेकिन बड़ी संख्या में संस्थानों में यह व्यवस्था कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
आरोप है कि कई वर्षों से शिक्षक अनुमोदन का मामला लंबित है, लेकिन इस दिशा में न तो प्रभावी जांच हुई और न ही किसी संस्थान के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई।शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि महाविद्यालयों में अनुमोदित शिक्षक ही नहीं हैं तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कौन दे रहा है।
ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब मानकों का पालन नहीं हो रहा है तो आखिर प्रवेश, परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया किस आधार पर संचालित की जा रही है।स्थिति यह है कि छात्र फीस जमा कर रहे हैं, परीक्षाएं दे रहे हैं और डिग्रियां भी प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी का मुद्दा वर्षों से जस का तस बना हुआ है।

