Site icon Uttar Pradesh Jagran

वेस्ट एशिया संकट के बीच भारत की तेल कूटनीति ग्लोबल बाजार पर भारी, अमेरिकी राजदूत भी चौंके

     दुनिया भर में तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी ने पूरी दुनिया का ब्लड प्रेशर हाई कर दिया है। दरअसल ईरान और अमेरिका युद्ध के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो गई है।

नई दिल्ली: वेस्ट एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की टेंशन बड़ा दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हालात बिगड़ने से दुनिया की तेल सप्लाई पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों की आवाजाही धीमी हो गई है। जहाजों पर हमलों और समुद्र में माइंस बिछाए जाने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों में तेज उछाल की चिंता पैदा कर दी है।

इसी बीच भारत वैश्विक तेल बाजार में एक स्थिर ताकत के रूप में उभरकर सामने आया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सप्लाई चेन में बाधाओं के बावजूद कच्चा तेल खरीद जारी रखने के लिए भारत की सराहना की है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में तेल की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में भारत एक अहम भागीदार की भूमिका निभा रहा है।

अमेरिका राजदूत सर्जियो गोर ने की भारत की तारीफ

गोर के मुताबिक, भारत की ओर से रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने से वैश्विक बाजार पर दबाव कम हुआ है। रूस दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑयल निर्यातकों में से एक है और उसके निर्यात में किसी भी तरह की अचानक कमी वैश्विक सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भारत का रूसी तेल खरीदना जारी रखना वैश्विक बाजार में संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित हो रहा है।

Exit mobile version